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Utra Jwaar | Doodhnath Singh
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Utra Jwaar | Doodhnath Singh

00:01:37
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उतरा ज्वार | दूधनाथ सिंहउतरा ज्वार जलमैला लहरेंगयीं क्षितिज के पार काला सागरअन्धी आँखें फाड़ताक रहा हैगहन नीलिमा बुझे हुए तारेकचपच-कचपचढूँढ़ रहे हैंठौर मैं हूँ मैं हूँयह दृश् ।खोज रहा हूँबंकिम चाँदक्षितिज किनारेमन मेंजो अदृश्य है ।

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