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Lehron Ka Geet | Sumitranandan Pant
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Lehron Ka Geet | Sumitranandan Pant

00:02:17
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लहरों का गीत । सुमित्रानंदन पंतअपने ही सुख से चिर चंचलहम खिल खिल पडती हैं प्रतिपल,जीवन के फेनिल मोती कोले ले चल करतल में टलमल!छू छू मृदु मलयानिल रह रहकरता प्राणों को पुलकाकुल;जीवन की लतिका में लहलहविकसा इच्छा के नव नव दल!सुन मधुर मरुत मुरली की ध्वनीगृह-पुलिन नांध, सुख से विह्वल,हम हुलस नृत्य करतीं हिल हिलखस खस पडता उर से अंचल!चिर जन्म-मरण को हँस हँस करहम आलिंगन करती पल पल,फिर फिर असीम से उठ उठ करफिर फिर उसमें हो हो ओझल!

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