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Kavitayein | Dharmesh
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कविताएँ । धर्मेशख़त्म हो चुकी हैं कविताएँशब्दों ने कर ली है सामूहिक आत्महत्यामजनूँ के क़त्ल हो जाने के डर सेलैला ने तिलांजलि दे दी है अपने प्रेम कीजंगल की हत्या पर आमादा शहरचीर चुका है नदी का हृदयसियारों को गाली देने वाले आदमी नेनोच खाया है एक और आदमी कोमेरी आँखों में अब भी बचा है प्रेमये इस दुनिया की तबाही का सूत्र है

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