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Koi Mere Saath Chale | Sarveshwar Dayal Saxena
Koi Mere Saath Chale | Sarveshwar Dayal Saxena

Koi Mere Saath Chale | Sarveshwar Dayal Saxena

00:02:22
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कोई मेरे साथ चले।  सर्वेश्वरदयाल सक्सेनामैंने कब कहाकोई मेरे साथ चलेचाहा ज़रूर!अक्सर दरख्तों के लियेजूते सिलवा लायाऔर उनके पास खडा रहावे अपनी हरीयालीअपने फूल फूल पर इतरातेअपनी चिडियों में उलझे रहेमैं आगे बढ गयाअपने पैरों कोउनकी तरहजडों में नहीं बदल पायायह जानते हुए भीकि आगे बढनानिरंतर कुछ खोते जानाऔर अकेले होते जाना हैमैं यहाँ तक आ गया हूँजहाँ दरख्तों की लंबी छायाएंमुझे घेरे हुए हैं......किसी साथ केया डूबते सूरज के कारणमुझे नहीं मालूममुझेऔर आगे जाना हैकोई मेरे साथ चलेमैंने कब कहाचाहा ज़रूर!

Koi Mere Saath Chale | Sarveshwar Dayal Saxena

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