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Maskhari | Ashutosh Sharma
Maskhari | Ashutosh Sharma

Maskhari | Ashutosh Sharma

00:02:15
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 मसखरी । आशुतोष शर्मा गए रोज़ इक दोस्त को मिल गयी उसकी खोई हुई प्रेमिकामुझे उसकी खोई हुई हंसी को पा जाने की थी ख़ुशीलौट आने का सुख सबको नहीं मिलता,हँसी मिल जाती है और भी कई बहानों सेप्रेमिकाओं के चले जाने का दुःख सबको नहीं मिलताजिनको लगता है मैं हूँ एक हंसोल मसखरासंवेदना का मज़ाक उड़ाता हुआउपेक्षा का एक भदेस चरवाहातो हाँ ,किसी रोज़ खो गई थी मेरी भी प्रेमिकाऔर  हँसी भीवो और बात है कि अकुताकर मैंने ही चुनी थीप्रेम और हँसी के बीच...

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