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Bhram | Sushma Kumari
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00:02:29
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भ्रम ।  सुषमा कुमारी आसमान में अब बादल नहीं दिखतादिखता है बादल के होने का एक भ्रम पेड़ों पर अब चिड़ियाँ नहीं रहतीरहता है उनके होने का एक भ्रम।फूर्लों पर अब मधुमक्खियाँ नहीं होतींऔर सड़कों पर अब नहीं होते रास्ते!इसी तरहजंगल में अब जंगल नहीं बसताथाली में नहीं होती रोटीअख़बार में नहीं होता समाचार,जीवन में नहीं होता प्रेम!अब किसान की आत्मा में नहीं बची खेतीयुवाओं के आँखों में नहीं बचे सपनेबच्चों के हा्थों में नहीं बचे खिलौने!देश में अब नहीं बचा देशआदमी में नहीं बचा थोड़ा-सा आदमी!हमारे-तुम्हारे परिदृश्य मेंइन दिनों बस बचा रह गया हैसबके होने का एक भ्रम!हमारी-तुम्हारी कलाई पर बंधी घड़ी मेंनहीं बचा अच्छा या बुरा समय!हम विकास की दुनिया केअभिमंत्रित लोग हैंजिन्हें अपने ही परिदृश्य सेगायब होती चीज़ेंअब दिखाई नहीं देती!

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