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Gehri Raat Hai | Zeb Ghauri
Gehri Raat Hai | Zeb Ghauri

Gehri Raat Hai | Zeb Ghauri

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गहरी रात है ।  ज़ेब ग़ौरीगहरी रात है और तूफ़ान का शोर बहुतघर के दर-ओ-दीवार भी हैं कमज़ोर बहुतदर-ओ-दीवार: दरवाज़ा और दीवारतेरे सामने आते हुए घबराता हूँलब पे तेरा इक़रार है दिल में चोर बहुतइक़रार: स्वीकार करनानक़्श कोई बाक़ी रह जाए मुश्किल हैआज लहू की रवानी में है ज़ोर बहुतनक़्श: रेखाचित्रदिल के किसी कोने में पड़े होंगे अब भीएक खुला आकाश पतंगें डोर बहुतमुझ से बिछड़ कर होगा समुंदर भी बेचैनरात ढले तो करता होगा शोर बहुतआ के कभी वीरानी-ए-दिल का तमाशा करइस जंगल में नाच रहे हैं मोर बहुतवीरानी-ए-दिल: मन के वीरान होने की अवस्थाअपने बसेरे पंछी लौट न पाया 'ज़ेब'शाम घटा भी उट्ठी थी घनघोर बहुत

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