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Akanksha | Nandkishore Acharya
Akanksha | Nandkishore Acharya

Akanksha | Nandkishore Acharya

00:01:59
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आकाँक्षा । नंदकिशोर आचार्यएक अतीत रक्त की भाँतिप्रवाहित रहता है मुझमेंएक भविष्य ने साँसों की तरहबाँध रखा है मुझेऔर मैं - घड़ी को सुई -भविष्य के अतीत में बदलने कीसूचना मात्र देता रह जाता हूँ।क्या कभी नहीं हो सकता यहएक पल के लिए ही सहीअतीत और भविष्यमुझमें न मिल पाएँऔर तब मैंमेरा सहारा लेने के लिए हाथ फैलातेभयभीत ईश्वरऔर मृत्यु कोशून्य में छटपटाते हुएदेख लूँ!

Akanksha | Nandkishore Acharya

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