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Hulchal |  Anurag Tiwari
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Hulchal | Anurag Tiwari

00:02:47
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हलचल।  अनुराग तिवारी तेज़ कुछ भी हो सकता हैकिंतुसबसे तेज़ क्या हैचीते की चालबाज़ की नज़रनहीं।सबसे तेज़ हलचल होती हैजैसे आज एक हलचल हुई,मेरी आहट से दीवार पर चिपकी छिपकलीकोने में घुस गई।सबसे तेज़ हलचल शेयर बाज़ार में नहीं होती!एक्ज़िट पोल में भी हलचल तेज़ नहीं होती!भारत पाक मैच में दिन भर हलचल रहती हैलेकिन सबसे तेज़ नहीं।सबसे तेज़ हलचलउस चेतना में होती हैजिसे भ्रम था सदैव स्वतंत्र रहने का!सबसे तेज़ हलचलउस राष्ट्र की भूमि में होती हैजिसे वरदान था अखण्ड होने काजो सदा उर्वर रही वासियों के पोषण को!सबसे तेज़ हलचलउस पेट में होती हैजिसके चूहे आख़िरी साॅंस तक कूदने के बादअब मर चुके हैं!सबसे तेज़ हलचलउस हिरण की आंखों में होती हैजिसने देख लिया है बाघदूर से!सबसे तेज़ हलचलउस स्त्री की धड़कन में होती हैजिसने बाघ नहीं देखाकिंतु देख लिया है एक जानवरजो मांस नहीं खाताख़ून नहीं पीताहड्डियां भी नहीं चूसतावह चमड़ियो को कूरेदता हुआनष्ट कर देता है आपकी आत्मा से'आबरू' जैसा कोई शब्द!

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