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Hoke Mayoos Na Yun Sham Se Dhalte Rahiye | Kunwar Bechain
Hoke Mayoos Na Yun Sham Se Dhalte Rahiye | Kunwar Bechain

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हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए।  कुंवर बेचैनहो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिएज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिएएक ही ठाँव पे ठहरेंगे तो थक जाएँगेधीरे धीरे ही सही राह पे चलते रहिएआप को ऊँचे जो उठना है तो आँसू की तरहदिल से आँखों की तरफ़ हँस के उछलते रहिएशाम को गिरता है तो सुब्ह सँभल जाता हैआप सूरज की तरह गिर के सँभलते रहिएप्यार से अच्छा नहीं कोई भी साँचा ऐ 'कुँवर'मोम बन के इसी साँचे में पिघलते रहिए

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