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“जीवन का अन्त नहीं है HIV”, पूजा मिश्रा का सदमे से निकलने का सफ़र
“जीवन का अन्त नहीं है HIV”, पूजा मिश्रा का सदमे से निकलने का सफ़र

“जीवन का अन्त नहीं है HIV”, पूजा मिश्रा का सदमे से निकलने का सफ़र

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पटना की पूजा मिश्रा का विवाह, 15 वर्ष की आयु में करा दिया गया था और 17 साल की छोटी सी उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो एचआईवी से संक्रमित हो गई थीं. तब से अब तक अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए, आज पूजा का संक्रमण पूरी तरह दबा हुआ है, और वो देशभर के युवाओं की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं. पूजा अब, भारत में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों का राष्ट्रीय गठबन्धन (NCPI+) की राष्ट्रीय युवा समन्वयक के रूप में, युवाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज जारी रखने की अहमियत पर काम करती हैं और अपने यूट्यूब चैनल “Youth Speak Now” से हज़ारों युवाओं तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाती हैं.पूजा मिश्रा ने, विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) के अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की सहयोगी अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह वह डर और कलंक से निकलकर, नेतृत्व करने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के मुक़ाम तक पहुँचीं; और क्यों वह चाहती हैं कि सभी युवा अपनी दवा, अपने हक़ और अपनी आवाज़ के साथ मज़बूती से खड़े हों.

“जीवन का अन्त नहीं है HIV”, पूजा मिश्रा का सदमे से निकलने का सफ़र

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